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भीड़ की हिंसा: संसद में विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा, राजनाथ बोले- 1984 में हुई थी सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग

नई दिल्ली: देशभर में बढ़ती भीड़ की हिंसा पर विपक्षी दलों ने आज एक बार फिर संसद में सरकार को घेरा. कांग्रेस, वामदलों समेत अन्य पार्टियों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर आरोप लगाए की इनकी सरकार बनने के बाद लिंचिंग की वारदातों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. कांग्रेस और सीपीएम ने अलवर में रकबर खान की हत्या मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की निगरानी में कराने की मांग की. विपक्षी तेवरों पर सरकार ने भी पलटवार किया. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस के शासनकाल में हुए 1984 सिख दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग थी. उन्होंने कहा, 'हम इस तरह की घटनाओं (मॉब लिंचिंग) को लेकर सावधान हैं. इस तरह की घटना हाल में शुरू नहीं हुई है. लिंचिंग की घटना कई साल से हो रही है. मैंने पहले भी कहा है कि देश में सबसे बड़ी मॉब लिंचिंग की घटना 1984 में हुई थी.' उन्होंने कहा कि हमने एक उच्च स्तरीय समिति बनाई है. यह 4 हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी. सरकार समिति की सिफारिशों पर कार्रवाई करेगी. राज्यसभा में भी गूंजा लिंचिग विवाद राजस्थान के अलवर जिले में गायों को लेकर जा रहे एक व्यक्ति को, गौ तस्कर होने के संदेह में भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डाले जाने का मुद्दा आज राज्यसभा में उठा और तृणमूल सहित विभिन्न दलों के सदस्यों ने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक कानून बनाए जाने की मांग की. शून्यकाल में तृणमूल कांग्रेस की शांता क्षेत्री ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस सरकार के सत्ता में आने के बाद से भीड़ द्वारा पीट पीट कर मार डालने की घटनाओं में करीब 88 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. शांता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर कहा है कि यह ठीक नहीं है और सरकार को इस पर रोक लगाने के लिए एक कानून लाना चाहिए. उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए और कानून बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं. विभिन्न दलों के सदस्यों ने शांता क्षेत्री के इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया और सरकार से इस मुद्दे का शीघ्र समाधान निकालने की मांग की. राज्यसभा चेयरमैन एम वेंकैया नायडू ने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेगी. पिछले दिनों राजस्थान के अलवर में रकबर उर्फ अकबर खान की भीड़ ने कथित तौर पर गो-तस्कर होने के शक में हत्या कर दी थी. वहीं चश्मदीदों का दावा है कि अकबर की मौत पुलिस पिटाई में हुई है. इस मामले में अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. वहीं राजस्थान पुलिस ने लापरवाही बरतने के आरोप में चार पुलिस अधिकारी को सस्पेंड कर दिया है और तीन को लाइन हाजिर किया है. आपको बता दें देशभर में बच्चा चोर के शक में भी हत्याएं और मारपीट हो रही है. विपक्षी दलों का आरोप है कि बीजेपी शासित राज्यों में इस तरह की घटना हो रही है और सरकार इसे रोकने में पूरी तरह विफल है.

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